भारत में बुद्ध धम्म के प्रमुख प्रचारक


  1. आंनद - यह बुद्ध और देवदत्त के भाई थे और बुद्ध के दस सर्वश्रेष्ठ शिष्यों में से एक हैं। यह लगातार बीस वर्षों तक बुद्ध की संगत में रहे। इन्हें गुरु का सर्वप्रिय शिष्य माना जाता था। आनंद को बुद्ध के निर्वाण के पश्चात प्रबोधन प्राप्त हुआ। वह अपनी स्मरण शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे।
  2. महाकश्यप - महाकश्यप मगध के ब्राह्मण थे, जो तथागत के नजदीकी शिष्य बन गए थे। इन्होंने प्रथम बौद्ध अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
  3. रानी खेमा - रानी खेमा सिद्ध धर्म संघिनी थीं। यह बीमबिसारा की रानी थीं। आगे चलकर खेमा बौद्ध धर्म की अच्छी शिक्षिका बनीं।
  4. महाप्रजापति - महाप्रजापति बुद्ध की माता महामाया की बहन थीं। इन दोनों ने राजा शुद्धोदन से शादी की थी। गौतम बुद्ध के जन्म के सात वर्ष पश्चात महामाया की मृत्यु हो गई। तत्पश्चात महाप्रजापति ने उनका अपने पुत्र जैसे पालन-पोषण किया। राजा शुद्धोदन की मृत्यु के बाद बौद्ध मठ में पहली महिला सदस्य के रूप में महाप्रजापिता को स्थान मिला था।
  5. मिलिंद - मिलिंद यूनानी राजा थे। ईसा की दूसरी सदी में इनका अफगानिस्तान और उत्तरी भारत पर राज था। बौद्ध भिक्षु नागसेन ने इन्हें बौद्ध धर्म की दीक्षा दी और इन्होंने बौद्ध धम्म को अपना लिया।
  6. सम्राट अशोक - सम्राट अशोक बौद्ध धर्म के अनुयायी और अखंड भारत के पहले सम्राट थे इन्होंने ईसा पूर्व 207 ईस्वी में मौर्य वंश की शुरुआत की। अशोक ने कई वर्षों की लड़ाई के बाद बौद्ध धर्म अपनाया था। इसके बाद उन्होंने युद्ध का बहिष्कार किया और शिकार करने पर पाबंदी लगाई। बौद्ध धर्म का तीसरा अधिवेशन अशोक के राज्यकाल के 17वें साल में संपन्न हुआ। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महिंद और पुत्री संघमित्रा को धर्मप्रचार के लिए श्रीलंका भेजा। इनके द्वारा श्रीलंका के राजा देवनामपिया तीस्सा ने बौद्ध धर्म अपनाया और वहां 'महाविहार' नामक बौद्ध मठ की स्थापना की। यह देश आधुनिक युग में भी थेरावदा बौद्ध धर्म का गढ़ है।
  7. देवमित्र धर्मपाल - भारत में महाबोधि सभा, जिसकी स्थापना श्रीलंका के देवमित्र धर्मपाल ने की थी, बौद्धधर्म को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है।
  8. भिक्षु चंद्रमणि महास्थविर - डॉ° भीम राव आंबेडकर के दीक्षा गुरु भिक्षु चंद्रमणि महास्थविर थे। चंद्रमणि का जन्म सन 1875 में म्यांमार में हुआ था। 1903 में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली और कुशीनगर आए। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर को 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में दीक्षा दी थी। उनका निर्वाण 1972 में हुआ था।
  9. भदन्त एबी ज्ञानेश्वर (म्यामार) - वर्तमान में कुशीनगर से बुद्ध धम्म का प्रसार कर रहे है।
  10. भदन्त नागार्जुन आर्य सुरई ससाई (जापान) - वर्तमान में नागपुर से बुद्ध धम्म का प्रसार कर रहे है।
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